फेसबुक वाला प्यार । सस्पेंस सरप्राइज...
सोसियल मीडिया की गजब सी माया,
बस ही गया यहां एक बार जो आया...।
में इस दुनिया से कोसो दूर था,
दोस्तो ने मुझे यहां ला कर फसाया...।
पर कभी कभी फसना अच्छा होता है,
कोई कोई फैसला हमारा सच्चा होता है...।
माना... अकल का कच्चा होता है,
पर… दिल बच्चा होता है...।
क्योकि किसी न किसी पे आ ही जाता है,
कोई न कोई इसे भा ही जाता है...।
लाख संभालो इस मासूम को,
अपने करतब दिखा ही जाता है...।
उस दिन भी यही हुआ
जब इस दिल ने करतब दिखाया,
मेरे खुद के dp पर
किसी आनजान लड़की का लाइक आया...।
कमेंट्स चेक किए
तो you are so handsome लिखा हुआ पाया,
सब से पहेले तो मुझे
फेक ID होने का खयाल आया...।
मेने खुद ID चेक की
और दोस्तो को भी काम पे लगाया,
पर ID तो यार रियल लगी यार
है ऊपरवाले ये कैसी माया…?
पागल तो में तब हो गया
जब मेरे फ्रेंड रिक्वेस्ट का पॉज़िटिव रिप्लाय आया,
दिल तो ( धक धक... धक धक... X 2 )
फिर टपली मार के उसे बिठाया...।
पहेले तो उसे फॉलो कर के
उस के पोस्ट सारे पढ़ने लगा,
दोस्ती का ये सिलसिला
कमेंट्स में आगे बढ़ने लगा...।
दिल तो मेसेंजर की ओर भागा
पर में उसे पकड़ने लगा,
पर दिल पर किस का जोर
ये वहाँ भी आगे बढ़ने लगा...।
फिर क्या
धीरे धीरे मेसेंजर में बाते आगे बढ़ने लगी,
आशिकी दोनों को चढ़ने लगी...।
इस मासूम को तो बिगाड़ ही दिया था,
पर वो भी थोड़ी थोड़ी बिगड़ने लगी...।
खबर ना रही दोनों को
शुबह शाम दोपहर की,
संयोग तो देखो
वो निकली मेरे ही शहर की…।
अंधेरी ज़िन्दगी में
आस ही नही थी सहेर की,
में भी खुशकिस्मत था
उपर वाले ने मुझ पे मेहेर की…।
में नाचा कूदा…
मेरा मन झगमगाया,
फिर मेने उस से मिलने का
मस्त प्लान बनाया…।
वो तो मना करेगी ही
में उस के सामने बहोत गिड़गिड़ाया,
तरह तरह के पेतंरो से
मेने उसे मनाया...।
प्लान बना उस से मिलने का
उसे गार्डन में बुलाया,
वो भी राज़ी हो गई
कुछ ऐसा चक्कर चलाया...।
उसे आने में देरी थी,
पर मुझ से बिल्कुल ना रहा गया...।
1 घंटे पहले ही,
में वहाँ पर चला गया...।
पर मेरे 5वे घर का पड़ोसी पप्पू,
वहाँ इवनिंग वॉक पर आ गया...।
वो साला वाइरल समाचार है,
में उसे देख घभरा गया...।
मोहल्ले में बात फैल जाती,
गर उसे पता चल जाता है...।
और लड़की के चक्कर वाली बात,
तो हर कोई मज़े से फैलाता है...।
में भी उस से भागता रहा,
वो पीछे पीछे चला आता है...।
फट तो तब गई…
जब पीछे से वो "भैया रुको" चिल्लाता है...।
में भी धीरे से पीछे मुड़ा,
और हल्का सा मुस्कुराया...।
वो भी धीरे धीरे से,
मेरे करीब आया...।
में तो धरा का धरा रह गया,
जब उस ने मुझे बताया...
पता है क्या बताया??????????
वो में ही थी…
फिर उस ने मेरे पैसों से…
250 रुपए वाला पिज़ा खाया...।
और हर महीने खिलाना पड़ेगा…
ऐसा प्रोमिस भी दिलवाया...।
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